‘5 KG’ मैसेज का क्या था मतलब? ED रिपोर्ट का हवाला देकर सुधाकर सिंह ने सरकार को घेरा

सुधाकर सिंह

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक और पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने शनिवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बार फिर बिहार सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए।

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक और पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने शनिवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बार फिर बिहार सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष कुमार मल्ल और कथित कारोबारी रिशु श्री के बीच संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी।

सुधाकर सिंह ने दावा किया कि ED की रिपोर्ट में दोनों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार संतोष कुमार मल्ल ने रिशु श्री को लगातार 15 बार फोन किया और जवाब नहीं मिलने पर संदेश भेजा कि “5 kg urgent required हैं, नहीं तो तेरा भाई परेशान हो जाएगा।”

‘5 kg’ का मतलब क्या था?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर “5 kg” का क्या अर्थ था। उनका आरोप था कि यह कोई सामान्य बातचीत नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के सोने या अन्य अवैध लेनदेन से जुड़ा संकेत हो सकता है। उन्होंने पूछा कि यदि एक वरिष्ठ IAS अधिकारी इस तरह का संदेश भेज रहा है, तो उस पर किसका दबाव था और जांच एजेंसियों ने उस व्यक्ति की पहचान करने की कोशिश क्यों नहीं की।

उन्होंने कहा कि ED के पास जब इतने व्यापक डिजिटल साक्ष्य, चैट रिकॉर्ड और दस्तावेज मौजूद हैं, तो अब तक संतोष कुमार मल्ल से प्रभावी पूछताछ क्यों नहीं हुई।

टेंडर प्रक्रिया में प्रभाव का आरोप

सुधाकर सिंह ने बताया कि जब ED ने चार्जशीट दाखिल की, तब संतोष कुमार मल्ल जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव थे। इससे पहले वे नगर विकास एवं आवास विभाग और लघु जल संसाधन विभाग के सचिव भी रह चुके हैं।

ED की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि रिशु श्री ने नगर विकास एवं आवास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से करीबी संबंध बनाकर सरकारी परियोजनाओं और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि विभागीय टेंडरों से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं पहले ही संबंधित कंपनियों को उपलब्ध करा दी जाती थीं, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिलता था।

सुधाकर सिंह के अनुसार परियोजनाओं की कुल राशि का लगभग 7 प्रतिशत तक कमीशन अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था।

गोपनीय सरकारी दस्तावेज निजी व्यक्ति के पास कैसे पहुंचे?

RJD विधायक ने ED की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिशु श्री के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से नगर विकास एवं आवास विभाग के कई गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए। इनमें विभागीय फाइलें, कैबिनेट नोट, नोटशीट, परियोजनाओं से जुड़े स्वीकृति पत्र और अन्य आधिकारिक दस्तावेज शामिल बताए गए हैं।

उन्होंने कहा कि किसी निजी व्यक्ति के पास इस तरह के संवेदनशील सरकारी दस्तावेज मिलना बेहद गंभीर मामला है। उनके अनुसार इन्हीं तथ्यों के आधार पर ED ने Official Secrets Act और Prevention of Corruption Act सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत आगे जांच की सिफारिश की है।

मुख्य अभियंता तारिणी दास पर भी सवाल

सुधाकर सिंह ने तारिणी दास का नाम लेते हुए कहा कि ED की रिपोर्ट में उनका भी उल्लेख है। उनके अनुसार भवन निर्माण विभाग में विभिन्न परियोजनाओं के बदले कथित रूप से कमीशन लेने और टेंडरों को प्रभावित करने का काम किया जाता था।

उन्होंने दावा किया कि ED की तलाशी में लगभग 11 करोड़ रुपये नगद बरामद होने का उल्लेख है और जांच रिपोर्ट के अनुसार तारिणी दास उन अधिकारियों में शामिल थे जिनके रिशु श्री से निकट संबंध बताए गए हैं।

कैबिनेट मंजूरी से पहले सेवा विस्तार का आरोप

सुधाकर सिंह ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार तारिणी दास 31 अक्टूबर 2024 को सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन 9 नवंबर 2024 को उन्हें संविदा के आधार पर सेवा विस्तार दे दिया गया। जबकि राज्य मंत्रिपरिषद ने इसकी मंजूरी 19 नवंबर 2024 की बैठक में दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट की स्वीकृति से पहले सेवा विस्तार दिया जाना अपने आप में जांच का विषय है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।

मंत्री और सचिव की भूमिका पर सवाल

RJD विधायक ने आरोप लगाया कि भवन निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार का एक संगठित तंत्र विकसित हो गया था। उन्होंने तत्कालीन सचिव कुमार रवि और संबंधित मंत्री जयंत राज की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

सुधाकर सिंह ने कहा कि यदि सेवा विस्तार का उद्देश्य अवैध वसूली की व्यवस्था को जारी रखना था, तो प्रशासनिक निर्णय लेने वाले अधिकारियों और मंत्री से भी पूछताछ होनी चाहिए।

‘जांच केवल छोटे अधिकारियों तक सीमित’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि ED की चार्जशीट और जांच रिपोर्ट में नौ IAS अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि जिन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम जांच रिपोर्ट में हैं, उनसे अब तक न तो प्रभावी पूछताछ हुई और न ही कोई स्पष्ट कानूनी कार्रवाई दिखाई दे रही है।

सुधाकर सिंह ने याद दिलाया कि 23 और 29 जून को उन्होंने सरकारी टेंडरों में घोटालों और विभागीय भ्रष्टाचार से जुड़े कई तथ्यों को सार्वजनिक किया था। इसके बाद विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने चार्जशीट दाखिल की, लेकिन कार्रवाई का दायरा अभी भी सीमित है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल

सुधाकर सिंह के इन आरोपों के बाद बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि ED की रिपोर्ट में जिन अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम आए हैं, उनसे निष्पक्ष और पारदर्शी पूछताछ की जाए।

फिलहाल सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यह मामला अब केवल विभागीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बिहार में टेंडर प्रक्रिया, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और उच्च प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है।

आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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