शरद पूर्णिमा पर करें इन 5 चीजों का दान, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, जानें क्या करें दान

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा 2026 पर अन्न, सफेद वस्त्र, खीर समेत 5 चीजों का दान शुभ माना जाता है। जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। यही वजह है कि देशभर में श्रद्धालु इस पर्व को आस्था और उत्साह के साथ मनाते हैं। इसे कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। ऐसी धार्मिक धारणा है कि जो लोग इस रात जागकर माता की आराधना करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। इस अवसर पर पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों को दान देने की भी परंपरा है।

अगर आप भी शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय करना चाहते हैं, तो अन्न, सफेद वस्त्र, खीर, दीपदान और मिठाई का दान कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि साल 2026 में शरद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और इस दिन किन पांच चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है? जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में शरद पूर्णिमा यानी कोजागर पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रदेव की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। चंद्रोदय का समय शाम करीब 5 बजे बताया गया है। कोजागर पूजा या निशिता काल का मुहूर्त रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर को रात 12:31 बजे तक बताया गया है।

हालांकि, पूजा के मुहूर्त में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।

शरद पूर्णिमा पर क्यों होती है मां लक्ष्मी की पूजा?

धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा को धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कोजागर पूर्णिमा का नाम भी इस रात जागरण करने की परंपरा से जुड़ा है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी इस रात अपने भक्तों को देखती हैं और उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं।

इस दिन कई घरों में मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। श्रद्धालु दीपक जलाते हैं, भोग लगाते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, जरूरतमंदों की सहायता करना और सामर्थ्य के अनुसार दान देना भी इस पर्व का अहम हिस्सा है।

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दान का महत्व केवल धार्मिक पुण्य तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े या मिठाई देना सामाजिक सहयोग और संवेदनशीलता का भी प्रतीक है। इसलिए इस दिन दान करते समय दिखावे के बजाय सेवा और श्रद्धा की भावना रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

शरद पूर्णिमा पर इन 5 चीजों का दान करना माना जाता है शुभ

1. अन्न दान से जुड़ी है समृद्धि की मान्यता

शरद पूर्णिमा पर चावल, गेहूं, दाल या अन्य खाद्य सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है। हिंदू परंपरा में अन्न दान को महत्वपूर्ण दान में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जरूरतमंदों को भोजन या अनाज देने से मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

इस दिन आप किसी जरूरतमंद परिवार को राशन दे सकते हैं या भोजन वितरण में सहयोग कर सकते हैं। दान करते समय अपनी क्षमता का ध्यान रखना चाहिए। किसी भूखे व्यक्ति को भोजन उपलब्ध कराना इस पर्व की सेवा भावना को सार्थक बना सकता है।

2. सफेद वस्त्रों का दान करना माना जाता है शुभ

शरद पूर्णिमा पर सफेद कपड़ों का दान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में सफेद रंग को शांति, पवित्रता और चंद्रदेव से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस अवसर पर जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।

आप साफ-सुथरे और उपयोग के योग्य कपड़े किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे सकते हैं। नए वस्त्र दान करना संभव हो तो वह भी अच्छा विकल्प है। इस परंपरा को जीवन में शांति, संतोष और सकारात्मकता की कामना से जोड़ा जाता है।

3. खीर का दान और प्रसाद बांटने की परंपरा

शरद पूर्णिमा की सबसे चर्चित परंपराओं में खीर बनाना और उसे चांदनी में रखना शामिल है। कई परिवार गाय के दूध और चावल से खीर तैयार करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रात में चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है।

इस अवसर पर खीर जरूरतमंदों और परिवार के अन्य लोगों में बांटना भी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आप पर्व की खुशियां दूसरों के साथ साझा कर सकते हैं। खीर को ढककर साफ-सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए, ताकि उसमें धूल, कीड़े या अन्य गंदगी न पहुंचे।

4. दीपदान से घर में सकारात्मकता की कामना

शरद पूर्णिमा पर दीपक जलाना और दीपदान करना भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु मंदिर, घर के आंगन या तुलसी के पास दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। कुछ स्थानों पर पवित्र नदियों के तट पर भी दीपदान की परंपरा है।

मान्यता है कि दीपदान से जीवन में अंधकार दूर होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन पूजा स्थल पर दीपक जलाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जा सकती है। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे जलता हुआ छोड़कर न जाएं।

5. गुड़ और सफेद मिठाई का दान

शरद पूर्णिमा पर गुड़ या सफेद रंग की मिठाइयों का दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में मिठाई बांटने को प्रेम, सद्भाव और खुशियां साझा करने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को मिठाई देकर पर्व की खुशियों में शामिल किया जा सकता है।

गुड़, बताशे या अन्य मिठाइयां अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान की जा सकती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में मधुरता और खुशहाली बनी रहती है। हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था के रूप में देखना चाहिए; इनके परिणामों की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने की क्या है परंपरा?

शरद पूर्णिमा पर चांदनी में खीर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं। इसी विश्वास के कारण लोग दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

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इस दौरान मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। श्रद्धालु परिवार की उन्नति, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। खीर रखने के लिए साफ बर्तन का इस्तेमाल करना और उसे ढककर रखना बेहतर है, ताकि भोजन सुरक्षित रहे।

शरद पूर्णिमा पर दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

शरद पूर्णिमा पर दान करने के लिए किसी बड़ी राशि या महंगी वस्तु की आवश्यकता नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, कपड़े या अन्य उपयोगी सामान दान किया जा सकता है। दान करते समय जरूरतमंद व्यक्ति की आवश्यकता और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।

इस पर्व पर पूजा के साथ परिवार के लोगों के बीच प्रेम और सहयोग बढ़ाने का प्रयास भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा से की गई पूजा और निस्वार्थ भाव से किया गया दान शुभ माना जाता है।

शरद पूर्णिमा चंद्रदेव की आराधना, मां लक्ष्मी की पूजा और दान-पुण्य के लिए विशेष पर्व है। अन्न, सफेद वस्त्र, खीर, दीपदान और मिठाई का दान इस दिन की प्रमुख परंपराओं में शामिल हैं। श्रद्धा, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता की भावना के साथ यह पर्व मनाना इसकी धार्मिक और सामाजिक महत्ता को और बढ़ाता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट