बिहार के सड़क नेटवर्क को मिलेगी मजबूती? फोरलेन कॉरिडोर और NH-122 परियोजना का बड़ा अपडेट

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रचनात्मक चित्र

निष्कर्ष भारत, संवाददाता-बिहार– बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 6,900 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर जल संसाधन विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इनमें पटना-आरा-रोहतास फोरलेन कॉरिडोर और मुजफ्फरपुर-बरौनी राष्ट्रीय राजमार्ग-122 के चौड़ीकरण की योजना प्रमुख है। इन परियोजनाओं के तहत नहरों के ऊपर और तटबंधों के किनारे एलिवेटेड सड़क, पुल तथा अन्य संरचनाओं के निर्माण का प्रस्ताव है। इन योजनाओं से संबंधित क्षेत्रों में आवागमन आसान होने और सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

हालांकि, NOC की प्रक्रिया आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सभी परियोजनाओं का निर्माण तुरंत शुरू हो जाएगा। निर्माण के लिए जरूरी अन्य स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं को भी पूरा करना होगा।

पटना-आरा-रोहतास फोरलेन कॉरिडोर पर 3,712 करोड़ रुपये खर्च

बिहार की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में पटना-आरा-रोहतास फोरलेन कॉरिडोर शामिल है। इसकी कुल प्रस्तावित लंबाई 120.10 किलोमीटर है। केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में इस परियोजना के लिए 3,712.40 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।

इस कॉरिडोर में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड सड़कें शामिल हैं। इसके निर्माण से पटना, भोजपुर और रोहतास क्षेत्र के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे इन इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिल सकती है और क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

परियोजना के पहले पैकेज में रोहतास जिले के सुअरा से राज्य राजमार्ग-12 पर गड़हनी तक 74.432 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की योजना है। इस पैकेज से जुड़े प्रस्ताव पर जल संसाधन विभाग ने 30 सितंबर को दूसरे चरण की अंतिम अनुमति दी। इससे संबंधित निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

परियोजना पूरी होने के बाद प्रमुख शहरों और आसपास के क्षेत्रों के बीच यात्रा अधिक सुगम होने की संभावना है। हालांकि, इसके अलग-अलग हिस्सों में निर्माण की शुरुआत और पूरा होने की समयसीमा संबंधित आधिकारिक जानकारी पर निर्भर करेगी।

मुजफ्फरपुर-बरौनी NH-122 को फोरलेन बनाने की तैयारी

मुजफ्फरपुर से बरौनी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-122 के 100 किलोमीटर से अधिक हिस्से को फोरलेन बनाने की योजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,200 करोड़ रुपये बताई गई है।

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योजना के तहत तिरहुत मुख्य नहर के किलोमीटर 222.72 से 227.08 के बीच नहर के दोनों तटबंधों पर एलिवेटेड सड़क सह पुल बनाने का प्रस्ताव है। इस तरह के निर्माण से नहर के आसपास उपलब्ध जगह का उपयोग करते हुए सड़क चौड़ीकरण की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इस मार्ग पर सड़क की क्षमता बढ़ने से वाहनों की आवाजाही सुगम करने और संबंधित क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की निर्माण शुरुआत, चरणबद्ध कार्य और पूरा होने की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

महना-जगन्नाथपुर सड़क पर बनेगा हाई लेवल पुल

मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड में महना से जगन्नाथपुर वाया मंसूरपुर सड़क पर आरसीसी हाई लेवल पुल बनाने की योजना भी प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III के तहत बनने वाला यह पुल तिरहुत मुख्य नहर के किलोमीटर 197.865 पर प्रस्तावित है।

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इस पुल का निर्माण संबंधित सड़क मार्ग पर आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। ग्रामीण और आसपास के इलाकों के लोगों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण की शुरुआत और पूरा होने की समयसीमा के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

पूर्वी लिंक नहर पर क्षतिग्रस्त पुल की जगह बनेगा अस्थायी स्टील पुल

पूर्वी लिंक नहर के किलोमीटर 2.80 पर क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर अस्थायी स्टील पुल बनाने की योजना है। इसके लिए 6 अक्टूबर 2026 को पहले चरण में सैद्धांतिक सहमति से संबंधित पत्र जारी किया गया था।

यह शुरुआती स्तर की सहमति है। पुल निर्माण के लिए आगे की आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं। अस्थायी स्टील पुल तैयार होने से संबंधित इलाके में लोगों की आवाजाही की परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।

बिहार में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर

करीब 6,900 करोड़ रुपये की लागत वाली इन सड़क परियोजनाओं से बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने की संभावना है। पटना-आरा-रोहतास फोरलेन कॉरिडोर से दक्षिण-पश्चिम बिहार की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है, जबकि मुजफ्फरपुर-बरौनी NH-122 के चौड़ीकरण से उत्तर बिहार के प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन को लाभ मिल सकता है।

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फिलहाल इन योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों और अनुमतियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में है। सभी जरूरी स्वीकृतियां मिलने, निर्माण कार्य शुरू होने और परियोजनाओं के पूरा होने की समयसीमा स्पष्ट होने के बाद ही इनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित विभाग इन परियोजनाओं को अगले चरण में कब तक ले जाते हैं।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट