नीरज का बड़ा दावा, बोले- चौथी बार NDA की जीत तय, हम डरने नही….लड़ने वाले
नीरज कुमार बोले- चौथी बार NDA की जीत तय, अनंत सिंह से घमासान जारी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक निर्वाचन सीट पर जारी सियासी घमासान के बीच जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रत्याशी और मौजूदा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने अपनी जीत का बड़ा दावा किया है। मोकामा स्थित परशुराम स्थान में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने कहा कि विरोधियों के तमाम हमलों के बावजूद वह न किसी को डराते हैं और न किसी से डरते हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह सूर्य का उगना तय है, उसी तरह चौथी बार एनडीए उम्मीदवार की जीत भी तय है।
नीरज कुमार ने अपने अंदाज में विरोधियों को संदेश देते हुए कहा, “हम अड़ने वाले हैं, गिरने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम बाबा परशुराम के वंशज हैं।” उनके इस बयान को पटना स्नातक सीट पर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच अहम माना जा रहा है। इस चुनाव में मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि जेडीयू के भीतर उभरे मतभेदों और नेताओं की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है।
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पटना स्नातक सीट पर उस समय सियासी हलचल तेज हो गई, जब मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हुई और चुनावी मुकाबला बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।
नीरज कुमार ने परशुराम स्थान में पूजा के बाद किया जीत का दावा
मोकामा के परशुराम स्थान में पूजा-अर्चना के बाद नीरज कुमार ने अपनी चुनावी लड़ाई को लेकर आत्मविश्वास जताया। उन्होंने कहा कि विरोधियों की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं, लेकिन इससे उनके हौसले पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उनका कहना था कि वह दबाव में आने के बजाय संघर्ष करना जानते हैं।
नीरज कुमार का बयान ऐसे समय आया है, जब पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव जेडीयू के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। एक तरफ पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में नीरज कुमार मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन ने मुकाबले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
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नीरज ने एनडीए की लगातार चौथी जीत का दावा करते हुए अपने समर्थकों का उत्साह बढ़ाने की कोशिश की। हालांकि, चुनाव में जीत का अंतिम फैसला मतगणना और आधिकारिक परिणाम से ही स्पष्ट होगा।
पटना स्नातक सीट पर नीरज और अनंत सिंह के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
पटना स्नातक सीट पर विवाद उस समय अधिक गहरा गया, जब अनंत सिंह खुलकर जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में उतर आए। अनंत सिंह के इस कदम को जेडीयू के लिए असहज स्थिति के रूप में देखा गया, क्योंकि नीरज कुमार पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं।
अनंत सिंह कई मौकों पर नीरज कुमार के खिलाफ बयान दे चुके थे। दूसरी ओर, नीरज कुमार भी अपने विरोधियों पर निशाना साधते रहे। दोनों नेताओं के बीच विवाद की एक प्रमुख वजह पुराने राजनीतिक मतभेद बताए गए। अनंत सिंह का आरोप था कि नीरज कुमार ने उनके विधानसभा चुनावों में विरोध किया था, लेकिन उस समय पार्टी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
अनंत सिंह ने पार्टी के अनुशासन और नियमों को लेकर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि यदि पार्टी के नियम हैं, तो उन्हें सभी नेताओं पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच विवाद को लेकर सामने आए आरोपों और दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने से बढ़ी थी समर्थकों की चिंता
चुनावी घमासान के बीच नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने की खबर ने भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मतदान से करीब तीन दिन पहले उनकी तबीयत खराब हो गई थी। हार्ट संबंधी परेशानी के बाद उन्हें सोमवार देर रात मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया था।
नीरज कुमार पहले से हृदय संबंधी समस्या से जूझ रहे थे। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनकी बीमारी को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।

नीरज की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलने के बाद उनके समर्थकों में चिंता बढ़ गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी भी मंगलवार शाम उनका हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे थे। चुनाव के ठीक पहले किसी प्रमुख उम्मीदवार की तबीयत खराब होना स्वाभाविक रूप से उसके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के लिए चिंता का विषय बन गया था।
अनंत सिंह ने बीमारी को लेकर कसा था तंज
नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद अनंत सिंह ने उन पर तंज कसा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि नीरज कुमार की यह पुरानी आदत रही है कि बूथ पर पैसा भेजने की जरूरत पड़ने पर वह बीमार हो जाते हैं और अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। अनंत सिंह ने दावा किया था कि कुछ समय बाद वह ठीक होकर लौट आते हैं।
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यह बयान अनंत सिंह का आरोप था और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। ऐसे में इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी ने दोनों नेताओं के बीच पहले से जारी जुबानी जंग को और तेज कर दिया था।
चुनावी राजनीति में इस तरह के आरोपों के बीच नीरज कुमार ने लगातार अपने विरोधियों को जवाब दिया। उनके समर्थकों की नजर इस बात पर रही कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद वह चुनावी मुकाबले में किस तरह अपनी स्थिति बनाए रखते हैं।
बाढ़ की सभा में भी नीरज ने विरोधियों को दिया था जवाब
इससे पहले पटना के बाढ़ में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए नीरज कुमार ने बिना नाम लिए अपने विरोधियों पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि वह जनता के बीच न्याय मांगने आए हैं और बार-बार उनके चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
नीरज कुमार ने खुद को अपराधी या गुंडा बताए जाने जैसी टिप्पणियों पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह डरने वाले नहीं, बल्कि अड़ने वाले हैं। तीन बार विधान परिषद सदस्य रह चुके नीरज ने अपने लंबे राजनीतिक सफर और पार्टी के प्रति निष्ठा का भी उल्लेख किया था।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी वफादारी जताते हुए कहा था कि उनके खिलाफ राजनीतिक या अनैतिक हमला वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनके इस बयान को विरोधियों के लिए सीधा राजनीतिक संदेश माना गया था।
ललन सिंह और लेसी सिंह का नाम लेकर भी दिया था जवाब
नीरज कुमार ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि कभी ललन सिंह पर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया जाता है, तो कभी लेसी सिंह का नाम लिया जाता है। उन्होंने कहा था कि किसी को कोई दूसरा नहीं फंसाता, बल्कि उसके कर्म उसे मुश्किल में डालते हैं।
नीरज के मुताबिक, जब उन पर आरोप लगे, तो उन्होंने पुलिस को प्रमाण दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं मिला। इन बयानों के जरिए उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को खारिज करने और अपनी राजनीतिक छवि का बचाव करने की कोशिश की थी।
अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के प्रति जताई थी निष्ठा
नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार कर रहे अनंत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह नीतीश कुमार को मानते हैं और बिहार के विकास में उनके योगदान के कारण उनके प्रशंसक हैं। अनंत सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने नीतीश कुमार के लिए नौ लोगों की कुर्बानी दी और खुद गोली भी खाई।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि नीरज कुमार ने चार विधानसभा चुनावों में उनका विरोध किया था, लेकिन पार्टी ने उस समय कोई कार्रवाई नहीं की। इसी आधार पर वह पार्टी के अनुशासन और नियमों को लेकर सवाल उठाते रहे।
पटना स्नातक सीट पर सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला अब केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं रह गया है। नीरज कुमार का चौथी बार एनडीए की जीत का दावा, अनंत सिंह का जन सुराज प्रत्याशी को समर्थन, दोनों नेताओं की बयानबाजी और नीरज की तबीयत बिगड़ने की घटना ने इसे बिहार की चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल कर दिया है।
नीरज कुमार ने अपने ताजा बयान से साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। वहीं, अनंत सिंह के रुख ने जेडीयू के भीतर राजनीतिक असहजता को चर्चा में बनाए रखा है। अब इस मुकाबले का वास्तविक नतीजा चुनाव परिणाम से ही सामने आएगा। फिलहाल, दोनों पक्षों के बयानों के बीच पटना स्नातक सीट पर सियासी घमासान जारी है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
