भोजपुर में नौकरी के बहाने लड़कियों को बनाया बंधक, पुलिस ने 12 को कराया मुक्त, दो गिरफ्तार

भोजपुर

भोजपुर में नौकरी के नाम पर 12 लड़कियां बंधक, पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (भोजपुर)। भोजपुर जिले में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लड़कियों को बंधक बनाने और उनसे जबरन नर्तकी का काम कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने ऑपरेशन नया सवेरा 3.0 के तहत कार्रवाई करते हुए 12 लड़कियों को मुक्त कराया है। इनमें तीन बालिग और नौ नाबालिग शामिल हैं। पुलिस ने मौके से एक महिला और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। मामले में पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम और बाल श्रम से संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

घटना ने एक बार फिर रोजगार का लालच देकर लड़कियों को शोषण के जाल में फंसाने वाले गिरोहों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि लड़कियों को किस तरह बुलाया गया, उन्हें कहां रखा जाता था और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

भोजपुर के धोबहा बागीचे में पुलिस की छापेमारी

पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर सूचना मिली कि धोबहा थाना क्षेत्र के धोबहा बागीचे में करकट और टिन से बने एक घर में कुछ लड़कियों को जबरन बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना में बताया गया कि वहां बालिग लड़कियों के साथ नाबालिग भी मौजूद हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और संबंधित स्थान पर छापेमारी की। इस दौरान वहां से कुल 12 लड़कियों को बरामद कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें नौ नाबालिग होने की जानकारी सामने आई है।

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मुक्त कराई गई लड़कियां बिहार के सीतामढ़ी, रोहतास, बक्सर और भोजपुर जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। अलग-अलग राज्यों और जिलों से लड़कियों के मिलने के बाद पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि उन्हें एक जगह तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।

नौकरी का झांसा देकर कराया जा रहा था नर्तकी का काम

प्रारंभिक पूछताछ में लड़कियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर बुलाया गया था। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उनसे कथित तौर पर जबरन नर्तकी का काम कराया जाने लगा। लड़कियों के बयानों के आधार पर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

इस तरह के मामलों में नौकरी का वादा कर युवतियों और किशोरियों को अपने जाल में फंसाने की आशंका रहती है। शुरुआत में रोजगार, अच्छी कमाई या बेहतर भविष्य का भरोसा दिया जाता है, लेकिन बाद में उनकी परिस्थितियों का फायदा उठाकर उन पर दबाव बनाया जा सकता है।

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हालांकि, इस मामले में लड़कियों को किस तरह नियंत्रित किया जाता था, उन्हें बाहर जाने की अनुमति थी या नहीं और उनके साथ किसी अन्य तरह का शोषण हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

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नाबालिग लड़कियों की बरामदगी के कारण मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस को अब उनके बयान, उम्र से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी है।

भोजपुर में दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मुकेश कुमार पासवान और जुली कुमारी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, मुकेश पासवान भोजपुर जिले के बबुरा गांव का निवासी है, जबकि जुली कुमारी उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले की रहने वाली है।

पूछताछ के दौरान लड़कियों ने कथित तौर पर इस गिरोह में धोबहा थाना क्षेत्र के धोबहा गांव निवासी केशो पासवान और किशोर राम, मानपुर गांव निवासी सोनू यादव तथा बबुरा गांव निवासी मुकेश पासवान और जुली कुमारी के शामिल होने की जानकारी दी है।

इन नामों के सामने आने के बाद पुलिस अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

सदर एसडीपीओ वन सुशील कुमार के अनुसार, मामले में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस का जोर मुक्त कराई गई लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर है।

पॉक्सो और जेजे एक्ट के तहत कार्रवाई

मामले में पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और बाल श्रम से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है। नौ नाबालिग लड़कियों की बरामदगी के कारण बाल संरक्षण से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण है।

पुलिस की कार्रवाई में महिला थानाध्यक्ष नीतू कुमारी, एएचटीयू शाखा की दारोगा गुड़िया कुमारी और धोबहा थानाध्यक्ष वर्षा रानी सहित अन्य महिला पुलिसकर्मी शामिल थीं।

मुक्त कराई गई लड़कियों के साथ आगे की प्रक्रिया में उनकी सुरक्षा, आवश्यक पूछताछ और संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने जैसे पहलुओं पर कार्रवाई की जा सकती है। नाबालिगों के मामलों में उनकी पहचान और निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना भी आवश्यक है।

भोजपुर में पहले भी चल चुका है नया सवेरा अभियान

भोजपुर जिले में लड़कियों को मुक्त कराने के लिए पुलिस की ओर से पहले भी ऑपरेशन नया सवेरा के तहत कार्रवाई की जा चुकी है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले मुफस्सिल और उदवंतनगर थाना क्षेत्रों में भी छापेमारी की गई थी। उन कार्रवाइयों के दौरान आर्केस्ट्रा में नर्तकी का काम करने वाली लड़कियों को मुक्त कराया गया था।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से जिले में ऐसे ठिकानों और गतिविधियों की जांच का महत्व बढ़ गया है, जहां रोजगार या काम का भरोसा देकर लड़कियों को बुलाया जाता है। पुलिस के सामने अब यह चुनौती है कि इस तरह के मामलों में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

नौकरी की तलाश करने वालों के लिए क्या है जरूरी?

भोजपुर की इस घटना से रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिजनों के लिए भी सतर्क रहने का संदेश मिलता है। नौकरी के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के बुलावे पर दूसरे जिले या राज्य में जाने से पहले संस्था, काम की प्रकृति, वेतन और रहने की व्यवस्था की जानकारी लेना जरूरी है।

परिजनों को भी चाहिए कि वे नौकरी के लिए बाहर जाने वाले युवक-युवतियों के संपर्क में रहें और उनके कार्यस्थल का विवरण अपने पास रखें। यदि किसी को जबरन काम कराने, बाहर जाने से रोकने या धमकी देने जैसी स्थिति का सामना करना पड़े, तो पुलिस अथवा संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों से मदद लेनी चाहिए।

भोजपुर में 12 लड़कियों को मुक्त कराने के बाद पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर वहां तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट