गया में हत्याकांड के 2 आरोपियों का एनकाउंटर, पुलिस का बड़ा एक्शन, अस्पताल में भर्ती

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गया में हत्याकांड के दो आरोपी एनकाउंटर में घायल, अस्पताल में भर्ती

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( गया)। गया में दरोगा के बेटे रानू सिंह हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों का एनकाउंटर किया है। पुलिस की कार्रवाई में श्याम बिहारी और गौरव उर्फ कला के पैर में गोली लगी है। दोनों घायलों को मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह मामला 19 अक्टूबर की रात मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नौरंगा आहार के पास सिद्धार्थपुरी कॉलोनी में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। इस घटना में मोतिहारी में तैनात दरोगा सुधांशु शेखर उर्फ पिंटू सिंह के छोटे बेटे रानू सिंह (30) की मौत हो गई थी।

बड़े बेटे मोनू सिंह (32) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मोनू का इलाज पटना के अस्पताल में चल रहा है। पुलिस और एसटीएफ की टीमें घटना के बाद से ही आरोपियों की तलाश में जुटी थीं। मामले में घायल आरोपी श्याम बिहारी के पिता और सेवानिवृत्त दरोगा नरेंद्र सिंह को भी पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।

गया में हत्याकांड के आरोपियों का एनकाउंटर

गयाजी में रानू सिंह हत्याकांड की जांच के बीच पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने श्याम बिहारी और गौरव उर्फ कला को पकड़ने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान दोनों के पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उन्हें मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस कार्रवाई को 19 अक्टूबर को हुई गोलीबारी की घटना के बाद अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। हत्या के बाद से पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी थीं। एसटीएफ की मदद से भी छापेमारी की जा रही थी।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि गोलीबारी की साजिश कैसे रची गई और घटना में शामिल अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

गया के सिद्धार्थपुरी में कैसे हुई थी रानू सिंह की हत्या?

यह घटना मानपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नौरंगा आहार के पास सिद्धार्थपुरी कॉलोनी की है। 19 अक्टूबर की रात अपराधियों ने दरोगा सुधांशु शेखर उर्फ पिंटू सिंह के दो बेटों को निशाना बनाकर गोलीबारी की थी। इस हमले में छोटे बेटे रानू सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बड़े बेटे मोनू सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।

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घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। परिवार पर अचानक हुए इस हमले से स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल बन गया। घायल मोनू को इलाज के लिए पहले मगध मेडिकल अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई।

रानू की मौत और मोनू के गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी थी। घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और परिजनों के बयान के आधार पर गोलीबारी के पीछे की वजह का पता लगाने का प्रयास किया गया।

गया हत्याकांड में पुराने विवाद और जुए के एंगल की जांच

शुरुआती जांच में पुलिस के सामने पुराने विवाद और जुए से जुड़े मामले की आशंका सामने आई थी। बताया गया कि दोनों भाइयों को फोन कर एक सुनसान जगह पर बुलाया गया था। इसके बाद कथित तौर पर घात लगाकर उन पर गोलियां चलाई गईं।

हालांकि, इस आशंका की आधिकारिक पुष्टि जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों भाइयों को किसने फोन किया था, उन्हें घटनास्थल पर क्यों बुलाया गया और गोलीबारी में किन लोगों ने भूमिका निभाई।

परिजनों के अनुसार, सोमवार रात करीब 11 बजे किसी परिचित का फोन आया था। फोन पर वहां झगड़ा होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद रानू और मोनू विवाद को शांत कराने तथा दोस्तों को छुड़ाने के लिए सिद्धार्थपुरी स्थित घटनास्थल पर पहुंचे थे।

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परिजनों का कहना है कि दोनों वहां विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक गोली चला दी गई। इस हमले में रानू की जान चली गई और मोनू गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस अब इस घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है।

घायल आरोपी श्याम बिहारी के पिता नरेंद्र सिंह भी गिरफ्तार

इस मामले में घायल आरोपी श्याम बिहारी के पिता नरेंद्र सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। नरेंद्र सिंह सेवानिवृत्त दरोगा बताए गए हैं। उनकी गिरफ्तारी भी हत्याकांड की जांच के दौरान हुई थी।

हालांकि, किसी आरोपी के परिजन की गिरफ्तारी अपने आप में उसकी संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस की जांच में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग आकलन किया जाना जरूरी है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गोलीबारी की घटना में किन लोगों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई। साथ ही, पुराने विवाद की आशंका और घटना से पहले हुई बातचीत के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

गया में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई तेज

रानू सिंह की हत्या के बाद गया पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार छापेमारी कर रही थीं। पुलिस का उद्देश्य घटना में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार करना और गोलीबारी के पीछे की वजह का पता लगाना है।

इस मामले में पहले भी दो आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई थी। अब श्याम बिहारी और गौरव उर्फ कला के घायल होने के बाद जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि घटना में इस्तेमाल हथियार कहां से आए और गोलीबारी की योजना किसने बनाई थी।

जांच के दौरान मिले साक्ष्य, आरोपियों से पूछताछ और अन्य लोगों के बयान मामले की दिशा तय कर सकते हैं। पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि हत्याकांड में कितने लोग शामिल थे और क्या इसके पीछे कोई व्यापक साजिश थी।

गया हत्याकांड में अब आगे क्या?

दरोगा के बेटे की हत्या और दूसरे बेटे पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। रानू सिंह की हत्या क्यों की गई, दोनों भाइयों को घटनास्थल पर किसने बुलाया और हमले में शामिल लोगों के बीच क्या संबंध था, इन बिंदुओं पर जांच जारी है।

श्याम बिहारी और गौरव उर्फ कला के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी स्थिति और पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। वहीं, पटना में इलाज करा रहे मोनू सिंह की हालत भी परिवार के लिए अहम बनी हुई है।

फिलहाल पुलिस की जांच का उद्देश्य हत्याकांड की पूरी साजिश का पता लगाना और घटना में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करना है। मामले में आगे की जानकारी पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच से सामने आने की उम्मीद है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट