फरक्का जल संधि पर JDU का बड़ा अभियान, बिहार के 12 जिलों में आज से शुरू होगा ‘नीतीश संवाद’

'नीतीश संवाद' फरक्का जल संधि

बिहार के 12 जिलों में आज से JDU का 'नीतीश संवाद'

निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना: फरक्का जल संधि के तीन दशक पूरे होने के बाद इसके नवीकरण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बिहार के हितों और राज्य को होने वाले नुकसान के मुद्दे पर बड़ा जनजागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला किया है। जदयू शनिवार से ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन करेगा, जिसके जरिए गंगा नदी के किनारे स्थित बिहार के 12 जिलों में लोगों को फरक्का जल संधि और उससे जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

इस अभियान की शुरुआत बिहार के बक्सर से होगी। जदयू का कहना है कि गंगा नदी बिहार में बक्सर के रास्ते प्रवेश करती है, इसलिए ‘नीतीश संवाद’ की शुरुआत भी इसी जिले से की जा रही है। कार्यक्रम में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे।

जदयू इस कार्यक्रम को दिसंबर से पहले पूरा करने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि फरक्का जल संधि के नवीकरण से पहले बिहार के लोगों को इस मुद्दे और राज्य के हितों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।

दिसंबर में हो सकता है फरक्का जल संधि का नवीकरण

फरक्का जल संधि का नवीकरण दिसंबर में संभावित है। ऐसे में जदयू ने इस मुद्दे को लेकर अपनी राजनीतिक और जनसंवाद गतिविधियों को तेज कर दिया है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि तीन दशक पहले हुई इस संधि के प्रभावों को लेकर बिहार के हितों पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 1986 में हुई फरक्का जल संधि में बिहार के साथ घोर अन्याय हुआ।

उनका कहना है कि इस संधि के कारण पिछले 30 वर्षों के दौरान बिहार को कई तरह के नुकसान का सामना करना पड़ा है। अब जबकि संधि के नवीकरण का समय नजदीक है, जदयू चाहता है कि नई व्यवस्था या नवीकरण के दौरान बिहार की जरूरतों और हितों को प्राथमिकता दी जाए।

इसी उद्देश्य से पार्टी ने ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है।

12 जिलों में पहुंचेगा जदयू का संवाद अभियान

जदयू का यह अभियान गंगा नदी के किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में चलाया जाएगा। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि फरक्का जल संधि का बिहार के जल संसाधनों और गंगा नदी से जुड़े क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ा है।

जदयू का कहना है कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य और जल संसाधनों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जनसंवाद अभियान है।

पार्टी इस दौरान लोगों की राय भी जानने की कोशिश करेगी और गंगा से जुड़े क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएगी। बाढ़, गाद, जल संकट और भविष्य में पानी की बढ़ती जरूरत जैसे मुद्दे इस संवाद कार्यक्रम के केंद्र में रहेंगे।

‘बिहार को आने वाले समय में पानी की बड़ी जरूरत’

जदयू नेताओं का कहना है कि फरक्का जल संधि के नवीकरण के दौरान बिहार की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

पार्टी का तर्क है कि पिछले तीन दशकों के दौरान बिहार की आबादी में काफी वृद्धि हुई है। जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ पीने के पानी, सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए जल की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

जदयू का कहना है कि आने वाले वर्षों में बिहार को पानी की और अधिक आवश्यकता होगी। ऐसे में राज्य के जल हितों को नजरअंदाज करके कोई भी फैसला करना भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।

पार्टी नेताओं के अनुसार, अब यह जरूरी है कि जल संसाधनों से संबंधित किसी भी बड़े फैसले में बिहार की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।

उत्तर बिहार में भी बढ़ रहा जल संकट

जदयू ने बिहार में जल संकट के बढ़ते खतरे को भी इस अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी का कहना है कि स्थिति अब ऐसी हो रही है कि पानी की प्रचुरता के लिए पहचाने जाने वाले उत्तर बिहार के कुछ इलाकों में भी जल संकट की स्थिति देखने को मिल रही है।

यह बदलाव बिहार के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। एक तरफ राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की समस्या बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ कई क्षेत्रों में पानी की कमी का संकट भी सामने आता है।

जदयू का कहना है कि यह विरोधाभासी स्थिति बिहार के जल प्रबंधन और नदी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत को दिखाती है।

गंगा में गाद से बढ़ रही बाढ़ की चुनौती

गंगा नदी में बढ़ती गाद भी बिहार के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जदयू का कहना है कि गंगा में गाद की मात्रा बढ़ने के कारण नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है।

इसके परिणामस्वरूप गंगा के तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। बारिश और जलस्तर बढ़ने के दौरान नदी किनारे बसे क्षेत्रों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बिहार में हर वर्ष बाढ़ एक बड़ी चुनौती बनती है और हजारों लोगों को इसका असर झेलना पड़ता है। ऐसे में गंगा में गाद और जल प्रवाह से जुड़े मुद्दों को फरक्का जल संधि के नवीकरण की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।

जदयू का मानना है कि बिहार के हितों की रक्षा के लिए इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

संजय झा ने राज्यसभा में उठाया था मुद्दा

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा पहले भी फरक्का जल संधि और बिहार के हितों का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठा चुके हैं। उन्होंने इस विषय को राज्यसभा में प्रमुखता से रखा था।

जदयू के अनुसार, इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से यह आश्वासन मिला कि फरक्का जल संधि के नवीकरण के दौरान बिहार के हितों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा।

अब पार्टी का ‘नीतीश संवाद’ अभियान इस मुद्दे को सीधे जनता के बीच ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

बक्सर से शुरू होकर पूरे गंगा तटवर्ती क्षेत्र तक पहुंचेगा संदेश

गंगा के बिहार में प्रवेश करने वाले स्थान बक्सर से अभियान की शुरुआत करना जदयू की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पार्टी का लक्ष्य गंगा किनारे रहने वाले लोगों को नदी, पानी, बाढ़ और भविष्य की जल जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर जागरूक करना है।

दिसंबर में संभावित फरक्का जल संधि के नवीकरण से पहले जदयू इस अभियान को पूरा करना चाहता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस जनसंवाद अभियान के जरिए कितने बड़े स्तर पर लोगों को जोड़ पाती है।

फिलहाल इतना तय है कि फरक्का जल संधि का मुद्दा एक बार फिर बिहार की राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में आ गया है। जदयू का दावा है कि ‘नीतीश संवाद’ के जरिए बिहार के हितों को लेकर एक व्यापक जनजागरण किया जाएगा, ताकि संधि के नवीकरण के समय राज्य की जरूरतों और समस्याओं को प्रमुखता से रखा जा सके।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: Patna से हटेगी लालू की विरासत: इंकम टैक्स चौराहे पर चलेगा बुलडोजर

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

You may have missed