चीनी से आगे बढ़ें चीनी मिलें, इथेनॉल और CBG से बढ़ाएं कमाई: नितिन गडकरी ने बताया किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता
किसानों की आय बढ़ाने के लिए Ethanol और CBG पर जोर, Nitin Gadkari का बड़ा बयान
निष्कर्ष भारत संवाददाता- नई दिल्ली: देश में इथेनॉल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी उद्योग के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि चीनी मिलों को केवल चीनी के उत्पादन और बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और दूसरे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ना चाहिए। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
गडकरी ने नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के एक्सीलेंस अवॉर्ड समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चीनी एक वैश्विक कमोडिटी है। ऐसे में केवल चीनी के कारोबार पर निर्भर रहना चीनी मिलों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में उत्पादन बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट आती है। इसका असर भारतीय चीनी मिलों पर भी पड़ता है।
चीनी मिलों को अपनाना होगा डायवर्सिफिकेशन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कृषि क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र की ओर डायवर्सिफिकेशन को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े संसाधनों का इस्तेमाल केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई तकनीक के जरिए उनसे अतिरिक्त आर्थिक मूल्य पैदा किया जाना चाहिए।
नितिन गडकरी ने कहा कि वह लंबे समय से कृषि क्षेत्र में ऊर्जा आधारित विविधीकरण की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में नॉलेज और टेक्नोलॉजी को आर्थिक लाभ में बदलना कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने चीनी मिलों को एग्री वैल्यू चेन में पैदा होने वाले उप-उत्पादों और वेस्टेज का बेहतर इस्तेमाल करने की सलाह दी। गन्ने की खोई, धान का पुआल, बांस और नेपियर घास जैसे कृषि अवशेषों को ईंधन और ऊर्जा में बदला जा सकता है।
‘वेस्ट से इकॉनमी’ बनाने पर जोर
नितिन गडकरी ने कृषि अवशेषों से आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की अवधारणा को ‘वेस्ट से इकॉनमी’ से जोड़ते हुए कहा कि जिस सामग्री को अक्सर कचरा समझा जाता है, उसका इस्तेमाल वैकल्पिक ईंधन और दूसरे उत्पाद बनाने में किया जा सकता है।
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गन्ने की खोई और अन्य कृषि अवशेषों से ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ किसानों और चीनी मिलों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे कृषि अवशेषों के निपटारे की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।
इथेनॉल को बताया प्रमुख अवसर
चीनी उद्योग के लिए इथेनॉल को एक महत्वपूर्ण वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बताते हुए गडकरी ने कहा कि गन्ने के रस और अन्य कच्चे माल को इथेनॉल में बदला जा सकता है। इसके अलावा डिस्टिलरी और इंटीग्रेटेड शुगर कॉम्प्लेक्स में होने वाली प्रोसेसिंग से निकलने वाले अलग-अलग उत्पादों से भी अतिरिक्त राजस्व हासिल किया जा सकता है।
नितिन गडकरी ने वैश्विक चीनी बाजार में ब्राजील की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां बड़े पैमाने पर मशीनीकृत गन्ने की खेती और उत्पादन लागत का असर अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में भारतीय चीनी मिलों के लिए केवल चीनी की बिक्री से होने वाली कमाई पर निर्भर रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
CBG से कृषि अवशेषों का होगा इस्तेमाल
केंद्रीय मंत्री ने कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG को भी चीनी मिलों और किसानों के लिए आय का संभावित स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि धान का पुआल, गन्ने की खोई, बांस और नेपियर घास जैसे कच्चे माल से CBG बनाने की तकनीक उपलब्ध है।
नितिन गडकरी के अनुसार, देश में 1,908 CBG प्लांट रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 132 एक्टिव बताए गए हैं। उन्होंने पंजाब और हरियाणा में बड़ी मात्रा में धान का पुआल जलाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि कृषि अवशेषों को बायोएनर्जी में बदला जा सकता है।
कृषि अवशेषों से CBG उत्पादन बढ़ने से एक तरफ पराली और दूसरे कृषि कचरे के प्रबंधन में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं।
गन्ने के मोम से भी कमाई का रास्ता
गडकरी ने चीनी मिलों में होने वाली प्रोसेसिंग से निकलने वाले उत्पादों के वैल्यू एडिशन की संभावनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रेस मड और मोम जैसे उत्पादों को उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की बात कही।
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उन्होंने महाराष्ट्र के सतारा की चीनी मिलों का उदाहरण देते हुए बताया कि गन्ने की प्रोसेसिंग से प्राप्त मोम की कीमत लगभग 300 से 350 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है और इसका इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट सेक्टर में किया जाता है।
किसानों और चीनी मिलों के लिए अतिरिक्त आय का लक्ष्य
नितिन गडकरी के बयान का मुख्य फोकस चीनी उद्योग को केवल एक उत्पाद पर निर्भर रहने के बजाय बहु-उत्पाद आधारित मॉडल की ओर ले जाने पर रहा। इथेनॉल, CBG, बायोएनर्जी और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों के जरिए चीनी मिलें अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकती हैं।
इस मॉडल में गन्ने के साथ-साथ कृषि अवशेषों और प्रोसेसिंग से निकलने वाले उप-उत्पादों का भी आर्थिक इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार और आय के अवसर बन सकते हैं और चीनी उद्योग को वैश्विक चीनी कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अपने कारोबार को विविध बनाने में मदद मिल सकती है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
