राघोपुर में टूटा जमीनदारी बांध, गांवों में तेजी से घुसा बाढ़ का पानी; ऊर्जा मंत्री के घर तक पहुंचा पानी
ऊर्जा मंत्री के घर तक पहुंचा पानी
निष्कर्ष भारत संवाददाता–राघोपुर/बिहार: राघोपुर गांव के समीप जमीनदारी बांध टूटने से इलाके में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। तटबंध टूटने के बाद गंगा का पानी तेजी से गांव की ओर फैलने लगा है। देखते ही देखते बाढ़ का पानी बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री के आवास तक पहुंच गया। बांध टूटने की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए हैं। तटबंध को और क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए युद्धस्तर पर कटावरोधी और बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीम फिलहाल टूटे हुए हिस्से को नियंत्रित करने के साथ-साथ गांव की ओर तेजी से बढ़ रहे पानी को रोकने की कोशिश में जुटी है। मौके पर विभाग के सभी संबंधित पदाधिकारी मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
तटबंध के दोनों नोज को मजबूत करने का काम
अधिकारियों के अनुसार, जमीनदारी बांध के जिस हिस्से में कटाव के बाद टूटने की स्थिति बनी है, वहां सबसे पहले तटबंध के दोनों नोज को मजबूत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कटाव को और आगे बढ़ने से रोकना है। इसके साथ ही बांध को पार कर गांव की तरफ पहुंच रहे पानी के बहाव को रोकने के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है।

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जल संसाधन विभाग की टीम बालू की बोरियों, मिट्टी और अन्य जरूरी संसाधनों की मदद से क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत करने में जुटी हुई है। अधिकारियों का प्रयास है कि पानी के तेज बहाव को नियंत्रित कर तटबंध के बाकी हिस्से को सुरक्षित रखा जा सके।
करीब पांच हजार की आबादी प्रभावित
जमीनदारी बांध टूटने के बाद राघोपुर गांव और आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब पांच हजार की आबादी इससे प्रभावित हुई है। ग्रामीणों के घरों और आसपास के इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो बाढ़ का पानी आसपास के दूसरे गांवों में भी फैल सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और पानी के फैलाव को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती है।
2004 से झेल रहे हैं बांध कटाव की समस्या
राघोपुर के ग्रामीणों के लिए जमीनदारी बांध का कटाव कोई नई समस्या नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2004 से ही इस इलाके में बाढ़ और तटबंध कटाव की समस्या बनी हुई है। वर्ष 2005 से यहां कटावरोधी कार्य शुरू किए गए थे। अलग-अलग चरणों में जल संसाधन विभाग की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर तटबंध को सुरक्षित करने और कटाव रोकने के प्रयास किए जाते रहे हैं।
बताया जा रहा है कि विभाग की ओर से अलग-अलग समय में करीब 14 करोड़ रुपये और इसके अलावा अन्य चरणों में भी बड़ी राशि कटावरोधी कार्यों पर खर्च की गई है। करीब नौ किलोमीटर के क्षेत्र में पहले भी कटाव की समस्या सामने आती रही है। इसके बावजूद लंबे अंतराल के बाद इस बार तटबंध पर पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि जमीनदारी बांध टूट गया।
14 साल बाद फिर बढ़ा दबाव
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 14 वर्षों बाद इस बार राघोपुर तटबंध पर बाढ़ के पानी का दबाव काफी अधिक देखा गया। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण तटबंध कमजोर पड़ गया और आखिरकार एक हिस्से में टूट गया।
जिस स्थान पर जमीनदारी बांध टूटा है, वह ऊर्जा मंत्री के आवास से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। बांध टूटने के बाद पानी तेजी से गांव की ओर बढ़ा और ऊर्जा मंत्री के घर तक भी बाढ़ का पानी पहुंच गया।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री से ली स्थिति की जानकारी
राघोपुर में बिगड़ती बाढ़ की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने भी जानकारी ली है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री से फोन पर बातचीत कर इलाके की स्थिति और जमीनदारी बांध टूटने के बाद चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।

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मुख्यमंत्री की ओर से जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहकर तटबंध को सुरक्षित करने और बाढ़ के पानी के फैलाव को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
बांध टूटने के बाद राघोपुर और आसपास के गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है और यदि गंगा का जलस्तर और ऊपर गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों को अपने घर, मवेशी और सामान सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है।
फिलहाल जल संसाधन विभाग की टीम टूटे तटबंध को नियंत्रित करने में पूरी ताकत झोंक रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि कटाव को आगे बढ़ने से रोका जाए और गांव की ओर बढ़ रहे पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सके। आने वाले घंटों में गंगा के जलस्तर और तटबंध की स्थिति पर निर्भर करेगा कि राघोपुर में बाढ़ का संकट कितना बढ़ता है।
राघोपुर में जमीनदारी बांध टूटने की घटना ने एक बार फिर इलाके में लंबे समय से चली आ रही तटबंध सुरक्षा और कटावरोधी कार्यों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा और बाढ़ के पानी के फैलाव को रोकना है
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भूमि आर्या की रिपोर्ट
