विपक्षी नेताओं से नहीं मिलेंगे CJI सूर्यकांत, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले
विपक्षी नेताओं से क्यों नहीं मिले CJI सूर्यकांत
निष्कर्ष भारत संवाददाता- देश में कथित वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने चुनावी अनियमितताओं को लेकर अपनी बात रखने के लिए सीजेआई से मिलने का समय मांगा था। विपक्षी दलों की योजना सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपने की भी थी। हालांकि, CJI ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के मामलों में औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के हर नागरिक के लिए खुले हैं।
CJI ने मुलाकात से क्यों किया इनकार?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें विपक्षी नेताओं की ओर से मुलाकात का अनुरोध करने वाला पत्र मिला था। उन्होंने बताया कि पत्र पर एक दिन पहले की तारीख थी और वह उस दिन बाहर थे, इसलिए पत्र उन्हें तुरंत नहीं मिल पाया। सीजेआई के मुताबिक, उन्होंने उसी रात जवाब भेजकर मुलाकात नहीं कर पाने के कारण स्पष्ट कर दिए थे।
रिपोर्टों के अनुसार, CJI ने अपने जवाब में यह भी कहा कि जिन मुद्दों पर विपक्षी नेता चर्चा करना चाहते हैं, वे न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उठाए जा सकते हैं। संबंधित विषयों पर मामले अदालत में लंबित होने के कारण उन्हें प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन के जरिए सुनना उचित नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले
विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले के बीच सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय तक सभी की पहुंच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश का कोई भी नागरिक, चाहे वह आम व्यक्ति हो या संसद और विधानसभा का निर्वाचित सदस्य, उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
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उनके मुताबिक, अदालत में याचिका दाखिल करने का अधिकार सभी को है। कानून के दायरे में जो भी राहत उचित होगी, उस पर न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जा सकता है।
CJI के इस रुख का संदेश यह है कि किसी राजनीतिक या चुनावी विवाद में राहत पाने के लिए अदालत के समक्ष विधिवत याचिका दाखिल की जा सकती है। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से अलग से मुलाकात करने के बजाय मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाना उचित माना गया।
विपक्ष की क्या हैं मांगें?
विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई मांगें उठाई हैं। इनमें कथित वोट चोरी के आरोपों की जांच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर रोक लगाने की मांग शामिल है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई है।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से सीजेआई से मुलाकात का अनुरोध इसी पृष्ठभूमि में किया गया था। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
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दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और विपक्ष के आरोपों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। वोट चोरी का आरोप विपक्ष की ओर से लगाया गया है; इसे न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया था यही रुख
CJI सूर्यकांत ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़ी संसदीय संयुक्त समिति (JPC) के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी अदालत के रुख पर बात की। इस समिति को एक देश, एक चुनाव से संबंधित विधेयकों पर विचार करना है। समिति की योजना सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से अनौपचारिक चर्चा करने की थी, लेकिन अदालत प्रशासन ने प्रस्तावित बैठक को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था।
CJI के अनुसार, इस मामले में हितों के टकराव की संभावना पर विचार करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों और उनकी सामूहिक राय थी कि ऐसी किसी भी स्थिति से बचना चाहिए, जिससे न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हों।
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से पहले कहा गया था कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में इस विषय पर न्यायाधीशों के साथ प्रशासनिक स्तर पर अनौपचारिक चर्चा करना उचित नहीं माना गया।
न्यायिक निष्पक्षता और राजनीतिक विवाद के बीच अहम फैसला
विपक्षी नेताओं से मुलाकात से इनकार और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ समिति के साथ बैठक रद्द किए जाने की घटनाओं में एक समान पहलू सामने आया है—ऐसे मामलों में न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर।
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CJI सूर्यकांत के रुख से स्पष्ट है कि राजनीतिक दलों की शिकायतों या चुनावी विवादों पर अदालत में विधिवत कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। हालांकि, किसी मुद्दे पर याचिका दाखिल होने के बाद भी राहत मिलना संबंधित तथ्यों, कानून और न्यायिक सुनवाई पर निर्भर करेगा।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्षी दल कथित चुनावी अनियमितताओं और SIR से जुड़े मुद्दों को आगे किस तरह न्यायिक मंच पर उठाते हैं। CJI के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अदालत तक पहुंचने का रास्ता खुला है, लेकिन इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
