जब्त शराब से सैनिटाइजर बनाएं सरकार, जीतन राम मांझी का नया सुझाव; शराबबंदी पर फिर उठाई समीक्षा की मांग
जीतन राम मांझी का बिहार सरकार को नया सुझाव
निष्कर्ष भारत संवाददाता- बिहार में शराबबंदी को लेकर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने एक बार फिर अपना रुख सामने रखा है। अब उन्होंने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग के साथ-साथ जब्त की गई शराब के इस्तेमाल को लेकर सरकार को नया सुझाव दिया है। मांझी ने कहा कि शराबबंदी के तहत जब्त होने वाली शराब को नष्ट करने के बजाय उसे एकत्र किया जाए और उससे सैनिटाइजर या दूसरे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएं।
मांझी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह सुझाव दिया। उनका कहना है कि अगर जब्त शराब का उपयोग दूसरे उत्पाद बनाने में किया जाए तो एक ओर सामग्री बर्बाद होने से बचेगी, वहीं दूसरी ओर सरकार को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। उनके इस बयान की रिपोर्ट आज कई मीडिया संस्थानों ने की है।
IRCTC नहीं, शराबबंदी पर मांझी का नया बयान
जीतन राम मांझी का ताजा बयान बिहार में लागू शराबबंदी कानून और उसके तहत जब्त की जाने वाली शराब के प्रबंधन से जुड़ा है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि बरामद शराब को सीधे नष्ट करने के बजाय उसका उपयोग वैकल्पिक उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है।
मांझी ने खास तौर पर सैनिटाइजर बनाने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक इससे जब्त सामग्री का इस्तेमाल हो सकेगा और सरकार को इससे आर्थिक फायदा भी मिल सकता है।
हालांकि, यह मांझी का सुझाव है। सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने या इसे लागू करने को लेकर फिलहाल कोई फैसला घोषित नहीं किया है।
जब्त शराब से सैनिटाइजर बनाने का सुझाव
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध शराब की बरामदगी और जब्ती की कार्रवाई लगातार होती रही है। इसी संदर्भ में मांझी ने कहा कि जब्त शराब को नष्ट करने के बजाय उसका उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसे एकत्र करके सैनिटाइजर अथवा दूसरे उपयोगी उत्पाद बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
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मांझी के मुताबिक इससे दोहरा फायदा हो सकता है। पहला, जब्त शराब को पूरी तरह नष्ट करने के बजाय उसका उपयोग हो सकेगा। दूसरा, अगर तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया के तहत इसका इस्तेमाल संभव होता है तो इससे सरकार को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
बिहार में लगातार होती है शराब की जब्ती
बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी और बरामदगी से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। जून 2026 में The New Indian Express ने आबकारी विभाग के हवाले से बताया था कि 2026 में राज्य पुलिस ने औसतन हर महीने 3.50 लाख लीटर से अधिक शराब जब्त की थी। रिपोर्ट के मुताबिक यह 2025 के मासिक औसत करीब 3.14 लाख लीटर से अधिक था।
इस तरह बड़ी मात्रा में जब्त शराब को सुरक्षित रखना, उसका निस्तारण करना और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया प्रशासन के सामने लगातार बनी रहने वाली चुनौती है।
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मांझी का नया सुझाव इसी जब्त सामग्री के वैकल्पिक इस्तेमाल से जुड़ा है।
शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते रहे हैं मांझी
जीतन राम मांझी लंबे समय से बिहार की शराबबंदी नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा की मांग करते रहे हैं। फरवरी 2026 में भी शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस हुई थी। उस समय बिहार सरकार की ओर से कानून की समीक्षा की मांग को खारिज किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा था कि शराबबंदी कानून की समीक्षा का सवाल नहीं उठता।
मांझी का तर्क रहा है कि शराबबंदी जिस उद्देश्य से लागू की गई थी, उसके क्रियान्वयन की समीक्षा होनी चाहिए। वह खास तौर पर गरीब और वंचित तबके पर कानून के प्रभाव तथा जहरीली शराब से जुड़ी घटनाओं का मुद्दा उठाते रहे हैं।
मांझी ने अब क्या बदलाव सुझाया?
इस बार मांझी ने सीधे कानून खत्म करने की बात करने के बजाय जब्त शराब के प्रबंधन को लेकर सुझाव दिया है। उनका प्रस्ताव है कि जब्त शराब को नष्ट करने के बजाय उसे अलग तरीके से उपयोग में लाया जाए।
सैनिटाइजर के अलावा उन्होंने दूसरे उपयोगी उत्पादों की संभावना की भी बात कही। हालांकि, ऐसे किसी भी इस्तेमाल के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों, उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होगा।
फिलहाल मांझी का यह प्रस्ताव सरकार के सामने एक राजनीतिक सुझाव के रूप में है।
सरकार को आर्थिक लाभ का तर्क
मांझी ने अपने सुझाव के पीछे आर्थिक लाभ का तर्क भी दिया है। उनका कहना है कि अगर जब्त शराब को किसी उपयोगी उत्पाद में बदला जा सके तो उसे पूरी तरह नष्ट करने के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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इससे सरकार को संभावित राजस्व या आर्थिक लाभ मिलने की बात उन्होंने कही है। हालांकि, इस मॉडल की व्यवहारिकता इस बात पर निर्भर करेगी कि जब्त शराब की प्रकृति क्या है, वह किस गुणवत्ता की है और मौजूदा कानूनों के तहत उसका पुन: उपयोग किस सीमा तक संभव है।
शराबबंदी पर बिहार में जारी है बहस
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। एक ओर सरकार शराबबंदी को अपनी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता इसके क्रियान्वयन की समीक्षा की मांग करते रहे हैं।
इसी बहस के बीच मांझी का जब्त शराब से सैनिटाइजर और दूसरे उत्पाद बनाने का सुझाव सामने आया है। इससे शराबबंदी के दौरान जब्त सामग्री के निस्तारण और संभावित वैकल्पिक उपयोग पर नई चर्चा शुरू हो सकती है।
अब सरकार के फैसले पर नजर
जीतन राम मांझी के सुझाव के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि बिहार सरकार जब्त शराब के वैकल्पिक इस्तेमाल को लेकर कोई अध्ययन या प्रक्रिया शुरू करती है या नहीं।
फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को लागू करने का कोई निर्णय सामने नहीं आया है। मांझी ने पत्रकारों से बातचीत में अपनी सलाह जरूर रखी है कि जब्त शराब को नष्ट करने के बजाय उससे सैनिटाइजर या अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर विचार किया जाना चाहिए।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
