डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज नवरात्र में व्रत रखने से पहले बरतें सावधानी, किडनी पर पड़ सकता है असर
नवरात्र में व्रत रखने से पहले सावधान!
निष्कर्ष भारत संवाददाता- नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ बड़ी संख्या में लोग व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन बिना अन्न ग्रहण किए रहते हैं, तो कुछ फलाहार करके उपवास करते हैं। हालांकि, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर (BP) से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। खासकर उन लोगों को, जिनका ब्लड शुगर या बीपी नियंत्रित नहीं रहता अथवा जिन्हें पहले से किडनी की बीमारी है।
व्रत के दौरान लंबे समय तक खाना नहीं खाना, पर्याप्त पानी नहीं पीना या दवाओं के समय में खुद से बदलाव करना स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे ब्लड शुगर बहुत कम होने, शरीर में पानी की कमी और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव का खतरा भी हो सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को समझना जरूरी है।
डायबिटीज के मरीज व्रत रखने से पहले क्या करें?
डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक भूखे रहना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली कुछ दवाएं लेने वाले लोगों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, कुछ मरीजों में ब्लड शुगर बढ़ भी सकता है।
ऐसे में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर आपकी दवाओं, ब्लड शुगर के स्तर और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर बताएंगे कि व्रत रखना सुरक्षित है या नहीं। दवा की खुराक या समय में बदलाव भी केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
हाई बीपी के मरीज नमक और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों से बचें
हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नवरात्र के दौरान खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। व्रत में खाए जाने वाले चिप्स, नमकीन और दूसरे पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। ज्यादा सोडियम का सेवन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में परेशानी पैदा कर सकता है।
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फलाहार के नाम पर जरूरत से ज्यादा नमक वाली चीजें खाने से बचें। ताजे फल और घर पर तैयार किए गए संतुलित खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, अगर आपको किडनी या दिल की बीमारी है, तो खानपान और तरल पदार्थों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय करें।
व्रत में ब्लड शुगर और बीपी की निगरानी जरूरी
नवरात्र में व्रत रखने वाले डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर की जांच करें।
- बीपी की निगरानी करें और असामान्य रीडिंग को नजरअंदाज न करें।
- चक्कर आने, कंपकंपी, पसीना आने, अचानक कमजोरी या भ्रम जैसे लक्षणों पर ध्यान दें।
- दवाओं को खुद से बंद न करें और न ही उनकी खुराक बदलें।
यदि ब्लड शुगर बहुत कम हो जाए, तो उसे ठीक करने के लिए तुरंत उचित कदम उठाना जरूरी है। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें।
पानी की कमी से बढ़ सकती है परेशानी
व्रत के दौरान पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लेने से डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इससे चक्कर, कमजोरी और कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन किडनी पर भी असर डाल सकता है।
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इसलिए, यदि आपके व्रत के नियम अनुमति देते हैं, तो दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें। हालांकि, किडनी या दिल की बीमारी के कुछ मरीजों को डॉक्टर तरल पदार्थ सीमित रखने की सलाह देते हैं। ऐसे लोगों को पानी की मात्रा खुद से नहीं बढ़ानी चाहिए।
किडनी के मरीज फलाहार में भी रखें सावधानी
किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए व्रत का भोजन चुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। हर फल और सब्जी हर मरीज के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं होती। कुछ मरीजों को खून में पोटैशियम या फॉस्फोरस का स्तर बढ़ने के कारण विशेष खानपान की सलाह दी जाती है।
इसलिए किडनी के मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह के सभी फल और सब्जियां खाना शुरू न करें और न ही पोटैशियम या फॉस्फोरस वाले सभी खाद्य पदार्थों को खुद से पूरी तरह बंद करें। उनकी जरूरत बीमारी की अवस्था और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करती है। पैकेट वाले व्रत के खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा भी जांचें।
इन लक्षणों पर व्रत जारी न रखें
अगर व्रत के दौरान अचानक तेज कमजोरी, बेहोशी, लगातार उल्टी, भ्रम, गंभीर चक्कर या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें, तो व्रत जारी रखना नुकसानदायक हो सकता है।
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ब्लड शुगर बहुत कम होने या गंभीर रूप से बढ़ने के संकेत मिलने पर तुरंत उचित चिकित्सा सहायता लें। बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या गंभीर भ्रम की स्थिति में आपातकालीन मदद लेना जरूरी है।
नवरात्र में आस्था के साथ सेहत का भी रखें ध्यान
नवरात्र में व्रत रखना व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन डायबिटीज, हाई बीपी और किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए सुरक्षा सबसे जरूरी है। व्रत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या जरूरत पड़ने पर नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। अपनी दवाओं, खानपान और पानी की मात्रा को लेकर स्पष्ट योजना बनाएं।
ध्यान रखें: हर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के व्रत रखने के तरीके को अपनाने के बजाय अपनी बीमारी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फैसला लें।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
