बिहार SIR मामले में नए फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की सफाई, कहा- हमने कोई फैसला नहीं दिया

फॉर्म 6

सुप्रीम कोर्ट

निष्कर्ष भारत संवाददाता- नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा फॉर्म 6 विवाद एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 12 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि बिहार SIR मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने नए फॉर्म 6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं दिया था। अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने चुनाव आयोग की ओर से फॉर्म में किए गए बदलावों को न तो मंजूरी दी थी और न ही उनकी वैधता पर कोई फैसला सुनाया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले में फॉर्म 6 में किए गए बदलावों और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी से चुनाव आयोग के उस बयान पर फिर चर्चा शुरू हो गई है, जिसमें बिहार SIR से जुड़े मई 2026 के फैसले का हवाला दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 पर क्या कहा?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की ओर से यह कहा जा रहा है कि नए फॉर्म 6 को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी।

इस पर जस्टिस जोयमाल्या बागची ने स्पष्ट किया कि जब बिहार SIR मामले की सुनवाई हुई थी, तब नया फॉर्म 6 अदालत के सामने विचार के लिए मौजूद ही नहीं था। ऐसे में उस फॉर्म की वैधता पर फैसला दिए जाने का सवाल नहीं उठता।

अदालत की टिप्पणी का मुख्य अर्थ यह है कि बिहार SIR पर दिए गए पुराने फैसले को नए फॉर्म 6 की न्यायिक मंजूरी के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसका अर्थ यह भी नहीं है कि कोर्ट ने नए फॉर्म को अवैध घोषित कर दिया है। उसकी वैधता पर अलग से विचार किया जाना बाकी है।

फॉर्म 6 क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

फॉर्म 6 चुनाव आयोग का आधिकारिक आवेदन पत्र है। इसका इस्तेमाल पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए करते हैं। नए मतदाताओं, विशेषकर पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए यह फॉर्म महत्वपूर्ण है।

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फॉर्म 6 से जुड़ा विवाद तब बढ़ा, जब मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया के साथ एक अतिरिक्त घोषणा और कुछ जानकारियों की जरूरत को लेकर सवाल उठे। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि फॉर्म में बदलाव करने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी नियमों के अनुरूप नहीं थी।

इस मामले में यह जांच महत्वपूर्ण है कि बदलाव किसने किए, किस प्रक्रिया के तहत किए गए और क्या इसके लिए आवश्यक मंजूरी ली गई थी। इन सवालों पर अदालत में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को क्या कहा था?

विवाद की एक प्रमुख वजह चुनाव आयोग की 26 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति बनी। आयोग ने इसमें कहा था कि बिहार SIR से जुड़े मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में फॉर्म 6 के साथ जुड़े घोषणा-पत्र को मान्यता दी गई थी।

इसके बाद फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे। 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने मामले में रिकॉर्ड देखने और यह पता लगाने की बात भी कही कि बदलाव किसने किए थे।

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हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने अपनी ओर से यह तर्क दिया था कि फॉर्म 6 में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR प्रक्रिया के लिए उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इस तरह विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि संबंधित दस्तावेज को फॉर्म में संशोधन माना जाए या अलग घोषणा के रूप में देखा जाए।

5 अक्टूबर के बाद फिर क्यों देनी पड़ी सफाई?

5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को मंजूरी नहीं दी है। इसके बाद 12 अक्टूबर को अदालत ने मामले को और स्पष्ट करते हुए कहा कि बिहार SIR पर पुराने फैसले के समय नया फॉर्म 6 मौजूद नहीं था।

अदालत ने यह भी साफ किया कि उसकी पिछली टिप्पणी को नए फॉर्म के पक्ष या विपक्ष में अंतिम फैसला नहीं समझा जाना चाहिए। यानी कोर्ट ने अभी तक नए फॉर्म की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

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इस स्पष्टीकरण का महत्व इसलिए है, क्योंकि चुनाव आयोग के बयान और अदालत की टिप्पणियों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। अब यह मामला फॉर्म में बदलाव की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार पर केंद्रित है।

बिहार SIR विवाद में आगे क्या होगा?

फॉर्म 6 से जुड़ा मामला केवल दस्तावेज में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसमें चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता पंजीकरण के नियमों और प्रशासनिक निर्णयों की वैधता जैसे सवाल भी शामिल हैं।

अब अदालत के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि विवादित घोषणा किस आधार पर जोड़ी गई और क्या संबंधित प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप थी। सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी ने फिलहाल इतना स्पष्ट किया है कि पुराने बिहार SIR फैसले को नए फॉर्म 6 की मंजूरी नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने नए फॉर्म 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही उसे अवैध घोषित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर उसके सामने अभी अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। अब आगे की सुनवाई और संबंधित रिकॉर्ड से तय होगा कि फॉर्म में किए गए बदलावों की कानूनी स्थिति क्या है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट